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  • 2017-11-07T10:45:35

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प्रकाश भौतिकी :- भाग
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प्रकाश भौतिकी :- भाग १ सूर्यनारायण : नैसर्गिक सफेद प्रकाश जनक ब्राइटनेस लाइटनेस या व्हाइटनेस दिखाने के लिये प्रकाश परावर्तन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भौतिक जगतका सत्तर प्रतिशत ज्ञान मनुष्य की आंख तक प्रकाश ही पहुचाता है। मनुष्य की दृष्टी या यांत्रिक सेन्सर तक कोई भी पदार्थका रंग, रुप, आकार जैसी भौतिकी परिमाण पहुचानेवाला प्रकाश वास्तवमे क्या है? प्रकाश = प्र (सामने) + काश (दिखाई दे रहा) प्रकाश शब्द मे ‘प्र’ यानीnii सामने और ‘काश’ का अर्थ दिखाई दे रहा दृश्य। इसका मतलब हुआ ‘प्रकाश’ शब्दका अर्थ है ‘सामने की वस्तु दिखानेवाला’। अंग्रेजीमे प्रकाश को लाइट [Light] कहते है। भौतिकविज्ञान के जनक सर आइझेक न्यूटन ने सत्रहरासो तीस मे (1730) लिखी ऑप्टिक्स् नामक किताबमे लिखा है कि, For the Rays to speak properly are not coloured. न्यूटन के कहने का मतलब है कि प्रकाश किरण मे कोई भी रंग नामक भौतिक वस्तु नही होती रहती है। न्यूटन के अनुसार मनुष्यकी मस्तिष्कमे हो रही मानसशास्त्रीय प्रक्रिया के अनुसार प्रकाश किरण के रंग का ज्ञान होता है। For the rays (of light) to speak properly are not coloured. In them there is nothing else than a certain Power and Disposition to stir up a sensation of this or that colour. सर न्युटन ने अपनी ऑप्टिक्स् Opticks किताबमे कहा है, प्रकाश किरण स्वयं रंगीन नही होती है। प्रकाश किरण की ऊर्जा और प्रवृत्ती नैसर्गिक होती है। यही इसी नैसर्गिक गुणधर्म के अनुसार दृष्टीको रंग का अनुभव होता है। क्रमशः LASEROPHOT LX 61 Brightness & Whiteness Tester
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